गोदी मीडिया और शरारती चरवाह

गोदी मीडिया और शरारती चरवाह

पत्रकारिता (TV media)  लोकतंत्र का अविभाज्य अंग है। प्रतिपल परिवर्तित होनेवाले जीवन और जगत का दर्शन पत्रकारिता द्वारा ही संभंव है। परिस्थितियों के अध्ययन, चिंतन-मनन और आत्माभिव्यक्ति की प्रवृत्ति और दूसरों का कल्याण अर्थात् लोकमंगल की भावना ने ही पत्रकारिता को जन्म दिया।

सामाजिक सरोकारों तथा सार्वजनिक हित से जुड़कर ही पत्रकारिता सार्थक बनती है। सामाजिक सरोकारों को व्यवस्था की दहलीज तक पहुँचाने और प्रशासन की जनहितकारी नीतियों तथा योजनाआें को समाज के सबसे निचले तबके तक ले जाने के दायित्व का निर्वाह ही सार्थक पत्रकारिता है।

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा पाया (स्तम्भ) भी कहा जाता है। पत्रकारिता ने लोकतंत्र में यह महत्त्वपूर्ण स्थान अपने आप नहीं हासिल किया है बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति पत्रकारिता के दायित्वों के महत्त्व को देखते हुए समाज ने ही दर्जा दिया है। कोई भी लोकतंत्र तभी सशक्त है जब पत्रकारिता सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी सार्थक भूमिका निभाती रहे। सार्थक पत्रकारिता का उद्देश्य ही यह होना चाहिए कि वह प्रशासन और समाज के बीच एक महत्त्वपूर्ण कड़ी की भूमिका अपनाये।

पत्रकारिता के इतिहास पर नजर डाले तो स्वतंत्रता के पूर्व पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्ति का लक्ष्य था। स्वतंत्रता के लिए चले आंदोलन और स्वाधीनता संग्राम में पत्रकारिता ने अहम और सार्थक भूमिका निभाई। उस दौर में पत्रकारिता ने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोने के साथ-साथ पूरे समाज को स्वाधीनता की प्राप्ति के लक्ष्य से जोड़े रखा।

इंटरनेट और सूचना के आधिकार (आर.टी.आई.) ने आज की पत्रकारिता को बहुआयामी और अनंत बना दिया है। आज कोई भी जानकारी पलक झपकते उपलब्ध की और कराई जा सकती है। मीडिया आज काफी सशक्त, स्वतंत्र और प्रभावकारी हो गया है। पत्रकारिता की पहुँच और आभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का व्यापक इस्तेमाल आमतौर पर सामाजिक सरोकारों और भलाई से ही जुड़ा है, किंतु कभी कभार इसका दुरपयोग भी होने लगा है।

संचार क्रांति तथा सूचना के आधिकार के अलावा आर्थिक उदारीकरण ने पत्रकारिता के चेहरे को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। विज्ञापनों से होनेवाली अथाह कमाई ने पत्रकारिता को काफी हद्द तक व्यावसायिक बना दिया है। मीडिया का लक्ष्य आज आधिक से आधिक कमाई का हो चला है। मीडिया के इसी व्यावसायिक दृष्टिकोन का नतीजा है कि उसका ध्यान सामाजिक सरोकारों से कहीं भटक गया है। मुद्दों पर आधारित पत्रकारिता के बजाय आज इन्फोटेमेंट ही मीडिया की सुर्खियों में रहता है।

इंटरनेट की व्यापकता और उस तक सार्वजनिक पहुँच के कारण उसका दुष्प्रयोग भी होने लगा है। इंटरनेट के उपयोगकर्ता निजी भड़ास निकालने और अतंर्गततथा आपत्तिजनक प्रलाप करने के लिए इस उपयोगी साधन का गलत इस्तेमाल करने लगे हैं। यही कारण है कि यदा-कदा मीडिया के इन बहुपयोगी साधनों पर अंकुश लगाने की बहस भी छिड़ जाती है। गनीमत है कि यह बहस सुझावों और शिकायतों तक ही सीमित रहती है।

उस पर अमल की नौबत नहीं आने पाती। लोकतंत्र के हित में यही है कि जहाँ तक हो सके पत्रकारिता को स्वतंत्र और निर्बाध रहने दिया जाए, और पत्रकारिता का अपना हित इसमें है कि वह आभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग समाज और सामाजिक सरोकारोंके प्रति अपने दायित्वों के ईमानदार निवर्हन के लिए करती रहे।

गोदी मीडिया और शरारती चरवाह

लेकिन, पिछले कुछ दिनों से इस मिडिया ने जाने क्या हो गया है जो पत्रकारिता कम और चाटुकारिता ज्यादा कर रहे हैं। यह केवल सत्ताधारी सरकार का दिल जीतने के लिए वह समाज में झूठ और नफरत फैला रहे हैं जिसे हम गोदी मीडिया कहते हैं।

गोदी मिडिया

गोदी मीडिया ने पत्रकारीता के स्तर को इतना निचे गिरा दिया है कि झूठ बोलना और नफरत फैलाना उनकी आदत बन गई है।

गोदी मीडिया की यह हालत देखकर मुझे एक शरारती चरवाहे की कथा याद आती है जो हमने बचपन में स्कूल में पढ़ी थी।

कथा विस्तार से- एक गांव में एक शरारती चरवाह रहता था वह रोज अपने जानवरों को चरवाने लेकर जाता था और रोज कुछ ना कुछ शरारत करता था।

एक दिन उसने गांव वालों के साथ शरारत करने की सोची और जोर जोर से चिल्लाने लगा कि शेर आया शेर आया मेरे जानवरों को खाने लगा यह सुनते ही गांव के लोग भयभीत हो जाते हैं और उनकी मदद के लिए पहुंच जाते हैं।

लेकिन जब गांव वाले घटनास्थल पर पहुंचते हैं तो वहां पर कोई शेर नहीं रहता, और जानवर मजे से अपने खाने में व्यस्त रहते हैं और लड़का पेड़ पर बैठा है शरारत करता रहता है।

इस बार गांव वाले उसको समझ देखकर गांव चले जाते हैं अपने काम में लग जाते हैं लेकिन दूसरे दिन भी वह लड़का वही शरारत करता है और गांव वाले उसे समझ देते हैं कि तुम तुम्हारे झुठी आदतों से बाज नहीं आए तो एक दिन तुम्हें पछताना पड़ेगा और तुम्हारी मदद करने के लिए कोई नहीं आएगा।

1 दिन सच में शेर आ जाता है और एक-एक करके जानवरों को खाने लगता है तब लड़का भयभीत होकर जोर-जोर से चिल्लाने लगता है कि शेर आया शेर आया बचा बचा मेरे जानवरों को बचा लेकिन गांव वाले समझते हैं कि यह वही पुरानी आदत से मजबूर है और झूठे हरकतें कर रहा है इसलिए कोई उसके मदद के लिए नहीं जाता है।

शेर पुरे जानवरों को खा जाता है।

कहानी का निष्कर्ष यह है कि आज तुम झूठ बोल बोल कर लोगों को गुमराह कर रहे हो लेकिन कल जब तुम सच बोलने लगे तो तुम्हारी बातों पर कोई विश्वास नहीं करने वाला।

आज यही काम अपने देश का गोदी मीडिया कर रहा है जो इतना झूठ बोल रहा है और समाज में नफरत फैला रहा है कि कल वह सच बोलने लगेंगे तो कोई उन पर विश्वास नहीं करने वाला।




आज का भारतीय प्रजातंत्र 2020

आज का भारतीय प्रजातंत्र

आज का भारतीय प्रजातंत्र

“जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती बसेरा वो भारत देश है मेरा वो भारत देश है मेरा।”
यार सोने की चिड़िया 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुई।
विश्व रत्ना डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर और उनकी सहकारी अतीक मेहनत करके 26 नवंबर 1949 को भारत को प्रजातंत्र बनाने की नींव रखी और 26 जनवरी 1950 को दुनिया में एक नया प्रजातंत्र का निर्माण हुआ वह प्रजातंत्र का भारतीय प्रजातंत्र।


पंडित जवाहरलाल नेहरू इस भारतीय प्रजातंत्र के पहले पंतप्रधान थे।
जब नेहरू जी भारत के पंतप्रधान बने थे तब भारत के सामने बड़ी विकट परिस्थिति थी क्योंकि देश अंग्रेजों से गुलामी से आजाद हुआ था और भारत के सामने काफी बड़ी चनिया पिया थी क्योंकि भारत का एक अंग पाकिस्तान से अलग हुआ था और उनका भी गुजारा करने के लिए भारत से पैसा गया था और उसे भी पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोला था।


पाकिस्तान का अलग होना उसका भारत पर आक्रमण करना और भारत के उज्जवल भविष्य की चिंता  इतनी सारी चुनौतियां उनके सामने थी।

इतने विकट परिस्थितियों के बावजूद भी पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत को कुशल नेतृत्व दिया और भारत को दुनिया के सबसे बड़ा प्रजातंत्र बनाने की ओर अग्रसर बनाया।
1962 में चीन का आक्रमण और उसके बाद 1965 में पाकिस्तान का आक्रमण और पंडित जवाहरलाल नेहरु जी का अचानक जाना भारत पर भारी संकट आ पड़ा लेकिन लाल बहादुर शास्त्री जी ने भारत को सक्षम नेतृत्व दिया और भारत के बुनियादी ढांचे को बनाए रखा।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनकर उभर रहा था। लेकिन बदकिस्मती से लाल बहादुर शास्त्री भी अचानक चले गए और भारत का नेतृत्व इंदिरा गांधी जी के हाथ में आया।

इंदिरा गांधी ने भारत को सबसे बड़ा प्रजातंत्र के साथ-साथ  दुनिया के दबाव के बावजूद भी भारत को अनु शक्ति बनाने का साहस दिखाया।

सन 1984 में राजनीतिक हत्याकांड में इंदिरा गांधी की हत्या हुई और देश का नेतृत्व राजीव गांधी जी के हाथ में आया। राजीव गांधी ने भारत को संगणक का सपना दिखाया और और भारत में संगणक युग की शुरुआत हुई।

राजीव गांधी की जाने के बाद भारत में आर्थिक मंदी थी ऐसे में सन 1991 में पीवी नरसिम्हा राव और उनके तत्कालीन अर्थ मंत्री डॉ मनमोहन सिंह भारत के लिए संकटमोचक बनकर आए और भारत की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया।

लेकिन बाबरी मस्जिद विध्वंस के कारण पी वी नरसिंह राव और कांग्रेस को सन 1996 में करारी हार झेलनी पड़ी।

इसके बाद आई सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई और सन 1990 में अटल बिहारी बाजपेई और उनके सहयोगी पार्टी ने राष्ट्रीय लोकशाही दल (NDA) स्थापित किया और सरकार स्थापन की जिसने 2004 तक अपना पूरा 5 साल का कार्यकाल पूरा किया लेकिन 2002 के गोधरा कांड में बीजेपी सरकार को कलंक लगा और उनको सत्ता गंवानी पड़ी।

2004 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी ऊपर कराई और उन्होंने अपने सहयोगी दल मिलकर संयुक्त पुरोगामी आघाडी (UPA) की स्थापना की और डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सरकार स्थापन की।

डॉ मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा चलाए गए कुछ सामाजिक कार्यक्रम ने भारतीय प्रजातंत्र का चेहरा मोहरा बदल दिया और भारतीय अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ ली और वह दुनिया में सबसे तेजी से विकसित होने वाली दूसरी अर्थव्यवस्था बन गई थी।

सन 2014 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी उभर कर आई और उसने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की स्थापना की।

लेकिन पिछले 6 सालों में भारतीय प्रजातंत्र को न जाने किसकी नजर लग गई कि वहां पर लोकशाही के पवित्र मंदिर की चाबी कुछ पूंजीपतियों के हाथों में जाने के आसार दिख रहे हैं।

भारत सरकार को मोहरा बनाकर कुछ पूंजीपति भारतीय लोकशाही को हथियाना चाहते हैं और उनको पूंजीवादी राष्ट्र बनाना चाहते हैं।

ऐसा लग रहा है कि भारतीय प्रजातंत्र राजा तंत्र बनने जा रहा है।






DELHI GOVERNMENT DEIGHTENIG DELHITE SINCE 2014

In democracy people elect their representatives for their welfare. So, people’s welfare become representative moral responsibility.

On 26 January 1950 India became democratic country. Currently, India undoubtedly biggest democracy in the world.

But, Indian democracy loosing its soul over period of time because of curruption and unnecessary involvement of some selfish politician in autonomous institution.

Democracy struggling for existance. In this dumping scenario of democratic degradation work of Arvind kejariwal led Delhi government admirable.

Delhi government steps for state welfare becoming role model for development.

Arvind kejariwal and his team took charge of Delhi government first time in 2013 but because of short of number government resigned.

After 6 months of relection Arvind kejariwal took charge of Delhi government with 96% mejority in house in 2014.

In his 6 years tenure of Delhi government kejariwal led AAP government overhauled some basic structure of state.

AAP government had done marvellous work in education, health, infrastructure and some basic needs of people like water and electricity.

DELHI GOVERNMENT

Some prominent work by kejariwal and his team

1. EDUCATION
2. HEALTH CARE
3. INFRASTRUCTURE
4. BASIC AMENITIES

1. EDUCATION


Education is soul of human development. But, day by day cost of education increasing of privatisation of education.

Government schools taking its last breath because of poor infrastructure and teacher’s unwilling to teach.

AAP government maked government education their first target.

They worked on government school infrastructure to increase number of admission in government schools.

They sent government teacher out of country for training and revolutionary changes in government schools.

Delhi deputy CM Manish Sisodiya and his team has done outstanding work in education. One of his minister Atishi played crucial role in it. They created state of art infrastructure in government schools.

Kejariwal ordered private school to curtail their fees and refund donation to parents with interest.

Improvement in government schools infrastructure and standard of education number of student increased in government schools which gave comparatively outstanding performance in examination.

Delhi government school

Kejariwal and his team teamwork brought revolution in state education.

2. HEALTH CARE


Health care is holistic service. But, it is difficult to say when this holistic service became business.

Health became unaffordable for common people because of some unnecessary high cost of treatment for common illness.

Delhi government brought an idea of mohalla clinic to make health care viable for common people.

In this clinic  some common illness for which patient spent lots of money in private hospitals getting treated effectively.

In mohalla clinic patient getting consulted property and right advice and necessary information.

Delhi government mohalla clinic

Former UNO secretory general Ban ki Moon visited and applauded this initiative by kejariwal government.

Mohalla clinic became role model for health care

Now, kejariwal government focusing on state of art health facilities for Delhi people. So, government building some hospitals and renovating some old building of government hospitals to which mohalla clinic getting connected.

Kejariwal government trying to set new model for health care revolution.

3. INFRASTRUCTURE


Infrastructure is the soul of development. People can enjoy and fill comfort in develope infrastructure.
It is prime duty of government to provide good infrastructure in exchange of tax paid by people for the same.

Delhi infrastructure taking shape under kejariwal government

As Delhi is most populous and busy city infrastructure development is very difficult  task.
Crowd and air pollution are main obstacles in infrastructure development.

Delhi government sort out reason for air pollution and maked roadmap to combat air pollution.


They implemented odd-even formula to reduce number of daily vehicle on road.  Because of which vehicle number reduced to halve.

As number of vehicles decrease it helps in reduction in air pollution.

State government engaged in creating state of art infrastructure to minimize crowd in market area.

4. BASIC AMENITIES

Water supply and 24×7 electricity is rights of every tax paying people. Kejariwal government tried honestly to fulfill promised he maked in his menifesto

Kejariwal set limite for water and electricity use. He promised people, if they were use electricity and water within set limite it would get if free. If they crossed limite then government will charge for every unit for people used.


Because of this maked habit of saving water and electricity in return saving money and expenses of government.

Although Arvind Kejriwal and his government had to face a lot of criticism from some media and people, but he remained firm on his work.  Today, the development of Delhi has become a role model for the entire country.

DELHI GOVERNMENT AND CORONA PANDEMIC

Delhi and Mumbai is most populous city with high population density in India. In high population density chances of spread of infection is higher than any other.

So, obviously cases of Corona high in this city. But some  media tried to make global focus on this two city. Meaning of this prapoganda is very clear not to say in different word.

But, administration of both city contained Corona very well. Thakray government in Maharashtra and Mumbai as well got word of applaud from WHO for their better management in most populous location in the world dharvi.

Delhi government was also on radar of media. This was right time for kejariwal to test the best.
He accepted challenge of media and started team working on Corona. 

They worked on their 8 points strategy which praised by prime minister Narendra Modi Delhi model.

1. Home isolation
They worked aggressively on home isolation. 80% of covid positive patient isolated in with consultation and medical. As patient getting treated at home chances of recovery increased.

2. Oximeter to patient in home isolation

One of the causes of mortality in COVID is the reduction in oxygen levels in the blood, hypoxia.

Unlike other ailments where this hypoxia is accompanied by breathlessness, in COVID, doctors witness a phenomenon of ‘Happy Hypoxia’, wherein a patient may have dangerously low levels of oxygen but may not have any awareness about it.

Monitoring oxygen levels and having an accessible supply of oxygen were crucial to prevent the mortality of patients in Home Isolation. “Delhi Govt provided oximeters to all patients recovering in Home Isolation, so that they could monitor their oxygen levels to prevent any sudden falls.

Delhi government purchased 59,600 oximeters and 58,974 are in use today by patients in home isolation,” Dr. Suresh Kumar, Director Lok Nayak Jai Prakash Narayan Hospital said.

3. Revamp testing and contact tracing initiatives –
Government increasing testing day by day from Very start. Delhi government is only government  with highest number of testing than any other.

4. Increasing numbers of bed in hospitals –

Till early June, there were only eight private hospitals that were treating Corona patients and these had a sum total of 700 beds available.

This was in addition to 2500 beds in Delhi Government hospitals. When the cases started rising in the first week of June, the eight private hospitals reached their capacity.

While more than 1000 beds continued to be available in government hospitals during this period, many people preferred private hospitals. Bed capacity was immediately expanded in private hospitals.

An order was passed by the Kejriwal government whereby all private hospitals with more than 50 beds had to reserve 40% of beds for treating COVID patients.

Not only did this mean that the number of COVID beds in private hospitals increased from 700 to 5000, but it also meant that COVID facilities were now available in all parts of the city.

In addition to this, hotels were linked to private hospitals, and thereby increasing the bed capacity of hospitals. With this hotel linkage, the number of beds in private hospitals went up from 5000 to 7000. Today, there are over 15,000 COVID beds in Delhi.

5. Realtime information of bed availability on app
Kejariwal government maked Corona app to find availability of bed at hospitals in Delhi. They reserve 40% bed in private hospitals. Today, 15,000 beds available for Corona. Any in Delhi can find on Corona app.

6. Increasing strength of ambulance –
For easy dispatching of health care services government started initially with 134 ambulance. As per demand kejariwal started expanding with private and cab service collaboration to fulfill short of ambulance services. Now, near about 700 vehicle in operation.

7. Establishment of first plasma bank of country –

In a first in the country, a ‘Plasma Bank’ has been set up by the Delhi government, so that patients can easily access convalescent plasma. An aggressive awareness campaign for plasma donation has been led by the chief minister himself to encourage recovered patients to come forward and donate their plasma.

Convalescent plasma has shown encouraging results across the world in preventing mortality amongst critical patients, as it provides the patient with antibodies to fight the virus

.Cheif minister’s direct public engagement –


Delhi cheif minister  Arvind kejariwal played crucial role in encouragement of patient with direct communication with home isolated patient.

Delhi government fight against Corona also became for country. Delhi has highest recovery rate of 90% of Corona.

Arvind kejariwal and his government delivered his best beyond aam adami’s expectation.

Delhi government

$1 BILLION TO CHARITY – THE LARGEST EVER DONATION BY PRIVATE INDIVIDUAL

$1 BILLION TO CHARITY IS THE LARGEST EVER DONATION BY PRIVATE INDIVIDUAL TO FIGHT AGAINST CORONA

$1 billion to charity

Social media giant Twitter CEO Jack Dorsey pledged $1 billions to charity  to fight against Corona virus pandemic

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$1 billion to charity is the largest donation by private individual as charity in fight against Corona.

Jack Dorsey, the CEO of social media giant and digital payment platform SQAURE

He told that he would pulled money from his start-up SQAURE.

After Corona he want to focus on girl’s health and  education and UBI.

The Twitter CEO’s pledge is the largest amount donated by an individual. Major donations so far have been made by the Bill and Melinda Gates Foundation who’ve pledged $100 million, less than 1 per cent of their fortune.