लॉक डाउन के सकारात्मक अनुभव

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लॉग डाउन के दौरान हमने कुछ बिंदुओं पर सकारात्मक अनुभव महसूस किया है।

परिवार
पशु
वातावरण
समाचार
पुरानी यादें

परिवार – लाकडाउन के कारण परिवार में काफी सकारात्मक बदल देखने को मिला। हमारी महत्वकांक्षा और करीयर हमें परिवार से बहुत दूर लेकर गया था। हमने पैसा और अपने करियर के दम पर अपनी जरूरत तो पूरी कर ली आलीशान बंगले बना ए फ्लैट खरीद लिया लेकिन उसमें रहने वाले मनुष्य का रिश्ता निभाने का समय हमारे पास नहीं था। हम छुट्टियों के तीज त्यौहार के दिन हमारे घर में आते थे परिवार से मिलने ,लेकिन त्योहार मनाने के कारण हमारे पास परिवार के  लिए हमारे पास समय नहीं था। लेकिन लॉक टाउन ने यह करके दिखाया आज हमें हमारे परिवार को और उनके लोगों को बहुत करीब से जानने का मौका बहुत दिनों बाद मिला है। आज हम हमारे परिवार के साथ सुख दुख बांट रहे हैं उनकी परेशानियां समझ रहे हैं मैं तो क़रोना को धन्यवाद ही दूंगा क्योंकि इतना अमूल्य पल उन्होंने हमारे जिंदगी में हमको दिया। जब रामायण और महाभारत देसी मालिका एक टीवी पर आती थी तब हम बहुत छोटे थे और वह सिर्फ हमारे लिए एक मनोरंजन था लेकिन आज हम हमारे परिवार के साथ उसे देख रहे हैं और उस इस मालिका के कुछ मूल्य हमारे जीवन में उतारने की शिक्षा में मिली है।

पशु
जितना अधिकार मनुष्य का इस धरती पर है उतना ही अधिकार पशुओं का भी है लेकिन मनुष्य ने उनकी आजादी उनसे ऐसे छीन ली थी कि उनको सांस लेना मुश्किल हो गया था। एक ब्रिटिश कहावत है Man is beautiful creation of God , गॉड कि इससे ब्यूटीफुल क्रिएशन ने धरती की इतनी दयनीय अवस्था बना दी टिक पशुओं को उनका अधिकार छीन लिया उनकी आजादी छीन ली। लेकिन इस ब्लॉग डाउन ने मनुष्य को घर में बंद कर दिया जिसके कारण पशुओं आज अपनी आजादी से जी रहे हैं और धरती का नजारा एक खूबसूरत सा नजर आ रहा है। मांस मटन के नाम पर जिस निरपराध और बेकसूर प्राणियों की हत्या हो रही थी आज वह नहीं हो रही।

वातावरण-
मनुष्य की इच्छा और आकांक्षा हो धरती का वातावरण इतना दूषित बना दिया था कि सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। लेकिन लोग डाउन का समय पूरा हुआ भी नहीं 11 दिन में ही यह पता चल गया कि धरती का वातावरण दूषित करने के लिए जिम्मेदार कौन है?
इस 11 दिन में वातावरण इतना शुद्ध हो गया कि जालंधर से जालंधर से 250 किलोमीटर दूर हिमालय की पर्वत श्रंखला साफ दिखाई दे रही है।

समाचार-
आजकल न्यूज़ चैनल में सकारात्मक बातें कम और नकारात्मक बातें कही प्रसार ज्यादा हो रहा था जैसे कि महिलाओं का रेप, उनका शोषण दुर्घटनाग्रस्त वाहन। मनुष्य सोचता कि उनकी दिन की शुरुआत तक सकारात्मक हो लेकिन वह समाचार देखता तो उनके दृश्य में सबसे पहले यही चीजें आ रही थी। लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भारत सरकार ने दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत जैसे मालिक काहे का पुनः प्रसारण चालू कर दिया जिसके कारण लोग अपना समय अच्छी चीजों में बिताए।

पुरानी यादें
दूरदर्शन पर प्रसारित किए जा रहे रामायण और महाभारत जैसे बालिकाओं ने हमारी पुरानी यादें ताजा कर दी।



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