पाप का बोझ बढ़ता ही जाये जाने कैसे ये धरती थमी है….।

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पाप का बोझ बढ़ता ही जाये जाने कैसे ये धरती थमी है….।

चीन में पैदा हुए कोरोनावायरस नाम का राक्षस ने आज पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया है। इसके सामने पूरी दुनिया बेबस और लाचार हो चुकी है। जिन्होंने भी यह पाप किया है उनको तो समय उसकी पाप कर्मों की सजा तो देगा ही।
लेकिन आज दुनिया पर आए इस संकट के लिए लोगों के कुछ किए कर्म पाप कर्म भी जिम्मेदार है।
जैसे कि आज मनुष्य मनुष्य में भेद हो रहा है धर्म के नाम पर जाते  के नाम पर ,पैसों के नाम पर, हिंदू, मुस्लिम, सिख इसाई, क्षत्रिय ,वैश्य ,ब्राह्मण आदी के नाम पर लोगों में भेद की जा रहा है। पैसा आज इंसानों से बड़ा हो गया है पैसों के दम पर इंसानों में भेद किए जा रहे हैं।
विश्व सनातन धर्म में गाय को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है उनको 33 कोटि देव की जननी कहा जाता, आज वह गाय पालने में लोगों को शर्म आ रही है लेकिन उनको कुत्तों की विष्ठा साफ करने में शर्म नहीं आ रही। कुछ लोगों में कुत्तों का स्थान इंसानों से भी बढ़कर है वह बड़ी शान से अपने घर के सामने लिख देती है BEWARE OF DOG।
जिहाद के नाम पर आज बेकसूर और निष्पाप लोगों की बली चढ़ाई जा रही है। हलाला और वैश्या व्यवसाय के नाम पर औरतों की इज्जत हलाल की जा रही है।
मांस मटन के नाम पर निष्पाप और बेकसूर प्राणियों की बलि दी जा रही है।
हर तरफ इतना जुल्म और बेबसी बढ़ गई है कि आम आदमी लाचार हो गया है।
यह सारी परिस्थिति देख कर मुझे 1986 में आई अंकुश पिक्चर के उस गाने की पंक्तियां याद आ रही है
” हर तरफ जुल्म है, बेबशी है।
सहमा सहमा सा हर आदमी है,
पाप का बोझ बढ़ता ही जाए ,
जाने कैसे ये धरती थमी है।”

यह पाप  इतना बढ़ गया है कि कोरोनावायरस नाम के राक्षस ने धरती को थमा दिया है।
इसका एक तर्क यह भीलगाया जा सकता है कि एक यह ईश्वरी संकेत हो सकते हैं।
धरती इस तरह थमी है कि  शेगाव ,शिरडी ,तिरुपति बालाजी, सिद्धिविनायक ,गोल्डन टेंपल, मक्का मदीना और वेटिकन सिटी जैसे पवित्र धार्मिक स्थल जहां कभी पैर रखने को भी जगह नहीं होती थी वहां समशान की तरह शांति है।
यह ईश्वरी संकेत मान के हम नकारात्मकता फैलाने की बजाय हम सकारात्मक पहल करते हैं और हम जिस भगवान को भी मानते हैं जिस रूप में मानते हैं उन्हें प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु हमारी सारी गलतियां माफ कर दो कोई भूल हुई तो हमे क्षमा किजिए।
” बोझ ममता का तु उठा ले,
तेरी रचना का अंत हो ना”
यह प्रार्थना करके सकारात्मक पहल करते हैं, पूरी दुनिया के लिए कामना करते हैं।

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